😊😜😬मित्रों😂😝😎
जीते जी लड़ते हे , मुस्कुराना भी उन्हिसे सीखते हे , पागलपंति की हद चूमकर जीना भी सम्भालते हे , ना जाने होती कैसी हे ये रिश्तेदारी ? दिल ओर दोस्तोंकि की दुनियादारी। ना आइन्स्टायन बता कर गया ना पायथागोरस ने सिद्ध किया , इनकी अनमोल जोड़ ने पूरा समीकरण सुलझा दिया। ना उम्र , ना पहचान , ना कोई कक्षा , खुले आसमान में चमकती हे हमारी नादानियत की शिक्षा। कभी चिजोंसे कभी सपनोंसे जुड़ता मन हमारा , पहाड़ का रास्ता बन जाता हे जीने का सहारा। बचपन के आम की गुटलि से खट्टे इमली तक , और जवानी के शोर मस्ती से नाइट आउट तक कभी उसकी भी चुस्की लगती हे , फक्र हे किताबोंके साथ हमारी उतनी ही बनती हे। दोस्तों , लिखने के लिए कम पड़ जाएगी कलमे और काग़ज़ , हाथ थम सा जाएगा , स्याही सूख जाएगी पर ; तुम्हारी ओर मेरी यारी हमेशा सदाबहार रहेगी। ©️ सुज़ित